|
1.
गर्भपात
किसे
कहते
हैं?
जब
बीस
सप्ताह
से कम
समय में
योनि कि
भ्रूण
के
स्वयं
पनप
पाने तक
के
विकास
से पहले
यदि
किसी
नैसर्गिक
अथवा
प्रयत्नपरक
साधन से
गर्भ
समाप्त
हो जाता
है तो
उसे
गर्भपात
कहते
हैं।
2.
नैसर्गिक
गर्भपात
क्या
होता है?
नैसर्गिक
गर्भपात
प्राकृतिक
कारणों
से होता
है जैसे
कि
भ्रूण
में दोष
या
गर्भाशय
की
दीवारों
में कई
कमी
होना।
3.
उत्प्रेरित
गर्भपात
करवाने
में
कानूनी
दिक्कते
क्या
होती
हैं?
गर्भपात
करवाने
की
कानूनी
दिक्कतों
का
निर्धारण
गर्भ का
चिकित्सा
परक पतन
एक्ट के (एन
टी पी)
साथ
किया
गया है।
भारत
में गैर
कानूनी
गर्भपात
की
समस्या
को
रोकने
के
उद्देश्य
से इस
एक्ट की
संरचना
की गई
थी।
4.
एम टी पी
एक्ट के
अनुसार,
किन किन
कारणों
से
महिला
गर्भपात
करवा
सकती है?
एम टी
पी एक्ट
के
अन्तर्गत
जिन
कारणों
से
महिला
गर्भपात
करवा
सकती है
वे
निम्नलिखित
हैं
-
जहां
महिला
को कोई
गम्भीर
रोग हो
और गर्भ
रखने से
उसको
जान का
खतरा हो,
जैसे
- हृदय
रोग
- उच्च
रक्तचाप
में
अत्यधिक
वृद्धि
- गर्भ के
दौरान
अनियन्त्रित
उल्टियां
- ग्रीवापरक/स्तन
कैंसर
- मेल्लिटस
मधुमेह
के साथ
आँखों
का रोग (रैटिनोपैथी)
- मिरगी
-मनोवैज्ञानिक
बीमारी
जहां
गर्भ को
धारण
किए
रहने से
नवजात
को भारी
खतरा हो
जिस से
उस में
गम्भीर
शारीरिक,
मानसिक
अपंगता
की
आशंका
रहे
जैसे -
- दीर्घकालिक
बीमारियां
- पहले
तीन
महीनों
में मां
को
रूबेला
बॉयरल
इन्फैक्शन
(जर्मन
मीसलस)
- यदि
पहले
बच्चों
को कोई
जन्मजात
अप्राकृतिक
विकृति
हो।
- आर एच
इसो -
इम्यूनाइसेशन
- भ्रूण
का
प्रकाश
में
उदघाटन
-
बलात्कार
के
परिणामस्वरूप
गर्भ
धारण
- वे
सामाजिक
आर्थिक
परिस्थितियां
जो मां
के
स्वस्थ्य
गर्भ
विकास
और
स्वस्थ
बच्चे
के जन्म
में
बाधक
हो।
-
गर्भनिरोधक
की
असफलता -
चाहे
जिस भी
माध्यम
का
उपयोग
किया
गया हो (प्राकृतिक
विधि,
अवरोधक
विधि/हॉरमोनल
विधि) यह
परिस्थिति
भारतीय
कानून
की
विलक्षण
विशेषता
है। इन
स्थितियों
में सभी
प्रकार
के
गर्भों
का पतन
कराया
जा सकता
है।
5.
एम टी पी
करवाने
के लिए
क्या
औरत को
अपने
पति से
लिखित
अनुमति
की
जरूरत
रहती है?
यदि
औरत
अठारह
वर्ष से
ऊपर है
तो
स्वयं
अनुमति
दे सकती
है उसे
पति से
अनुमति
की
जरूरत
नहीं
होती।
6.
यदि वह
अठारह
वर्ष से
कम उम्र
की हो तो
किस की
अनुमति
की
जरूरत
रहती है?
ऐसी
स्थिति
में उसे
अपने
संरक्षक
की
लिखित
अनुमति
की
जरूरत
रहती
है।
7.
एम टी पी
करने
वाली
कौन सी
सरकार
द्वारा
प्राधिकृत
संस्थाएं
होती है
जिन्हें
इसे
करने की
अनुमति
रहती है?
जिस
किसी
संस्था
के पास
सरकार
का
लाइसेन्स
हो उसे
एम टी पी
करने का
अधिकार
रहता
है।
8.
पहले
ट्रिमस्टर
में
गर्भपात
की क्या
विधियां
है?
पहले
ट्रिमस्टर
में किए
जा सकने
वाले
गर्भपात
की
विधियों
में
शामिल
है।
ग्रीवा
को ढीला
करके
गर्भाशया
को खाली
करना।
क्युरेटैज/सॅक्शन
इवैक्युरेशन/वैक्युम
एसपिरेशन/डिलेटेशन
और खाली
करना
माहवारी
एसपिरेशन
(एम आर)
चिकित्सकीय
विधियां
9.
ग्रीवा
को ढीला
करके
खाली
करना
क्या
होता है?
गर्भ
की
प्रारम्भावस्था
में की
जाने
वाले यह
एक
प्रकार
की
शल्यक्रिया
है, यह 12
सप्ताह
से पहले
होती है,
पहले
ग्रीवा
को ढीला
किया
जाता है
इसके
लिए एक
अन्दर
से खाली
रॉड
डाली
जाती है
जो कि
ग्रीवा
को
विस्तृत
कर देती
है, फिर
मशीन
द्वारा
गर्भाशय
के
अन्दर
के
पदार्थ
को
खरोंचकर
या
चूसकर
या
दोनों
तरीके
से बाहर
निकाल
लिया
जाता
है। इस
प्रक्रिया
में
लगभग 15
मिनट
लगते
हैं।
10.
ग्रीवा
को
विस्तृत
करने और
खाली
करने के
क्या
लाभ हैं?
लाभ
हैं
- एक बार
की
प्रक्रिया
- सुरक्षित
- नसबन्दी
या
इन्टरा
युटरीन
डिवाइज़
डालने
की
सम्भावना
रहती है
- उसी दिन
घर
वापिस
जा सकते
हैं।
- दूसरे
दिन काम
पर
वापिस
लौट
सकते
हैं।
11.
ग्रीवा
परक
विस्तार
और खाली
करने की
विधि के
साथ
क्या
खतरे
जुड़े
रहते
हैं?
खरतों
में
शामिल
है :
- एनसथिशीया
के लिए
प्रयुक्त
दवाओं
की
प्रतिक्रिया
- रक्त
स्राव
- गर्भाशय
और
अण्डवाही
ट्यूब
में
इन्फैक्शन
- गर्भाशय
के छेदन
की
दुर्घटना
- भावात्मक
कष्ट
12.
माहवारी
का
नियमन
या
एसपिरेशन
क्या है? ekgokjh
dk fu;eu ;k ,lfijs'ku D;k gS\
महवारी
नियमन
को
मिनिसक्शन,
मिनिएबोरशन,
वैक्युम
एसपिरेशन,
लंच
टाइम
एबोरशन
भी कहते
हैं जो
कि
माहवारी
न होने
के 1 से 3
सप्ताह
के भीतर
किया
जाता
है। यह
प्रक्रिया
बाह्य
रोगी के
रूप में
ही की
जाती
है।
गर्भाशय
में
प्लास्टिक
की एक
पतली सी
ट्यूब
डाली
जाती है
और
सरिंज
में
नैगेटिव
प्रेशर
बनाकर
अन्दर
के
पदार्थ
को बाहर
खींच
लिया
जाता
है। इस
प्रक्रिया
को करने
में दस
मिनट का
समय
लगता
है।
13.
माहवारी
नियमन
के लाभ
क्या है?
लाभों
में
शामिल
हैं :
- अस्पताल
में
भर्ती
होने की
जरूरत
नहीं।
- एनस्थीशिया
के बिना
किया
जाता
है।
- शल्यक्रिया
के खतरे
कम होते
हैं
- व्यक्ति
घर जा
सकता है
और अपने
दैनिक
कामकाज
कर सकता
है।
14.
माहवारी
नियमन
के साथ
कौन से
खतरे
जुड़े
हैं?
सम्बन्धित
खतरों
में
शामिल
है -
- प्रक्रिया
की
असफलता
- रक्त
स्राव
- इन्फैक्शन
15.
पहले
ट्रिमस्टर
के गर्भ
का पतन
करने के
लिए
क्या
चिकित्सकीय
विधियां
हैं?
इसमें
मुख्यतः
प्रोस्टाग्लेन्डिन
नामक
ड्रग
समूह की
दवाओं
का
प्रयोग
किया
जाता है
जिसमें
मुख्यतः
प्रोस्टाग्लेन्डिन
नामक
ड्रग
समूह की
दवाओं
का
प्रयोग
किया
जाता है
जिसका
अनेक
मार्गों
से
उपयोग
किया जा
सकता है
जैसे कि
मुख (जिन्हें
एबोरशन
पिल
कहते
हैं),
इन्टरामस्कुलर,
इन्टराबीनस
या योनि
में
इन्जैक्शन
द्वारा।
इन
दवाओं
का
अकेले
अकेले
अथवा
कुछ
दवाओं
को
मिलाकर
दिया
जाता
है।
(1)
मैथोट्रक्सेंट
-
मिसोप्रोस्टल
विधि -
महिला
को
मैथोट्रक्सेट
का
इन्जैक्शन
दिया
जाता
है।
पांच से
सात दिन
के बाद
वह
वापिस
आती है
और उसे
योनि
में
डालने
के लिए
मिसोप्रोस्टल
की
गोलियां
दी जाती
है। एक
दो दिन
के बाद
घर पर ही
गर्भ
समाप्त
हो जाता
है।
गर्भ के
दौरान
जो
भ्रूण
एवं
अन्य
टिशु
पैदा
हुए थे
वे योनि
द्वार
से बाहर
निकल
जाते
हैं।
(2)
मिफेप्रिस्टोन
-
मिसोप्रोस्टल
विधि -
मिफेप्रिस्टोन
को आर यू -
486 भी
कहते है,
यह
एन्टीप्रोजेस्ट्रोन
होता
है।
महिला
मिफेप्रिस्टोन
का एक
डोस
खाती है
पांच से
सात दिन
में
लौटकर
अपनी
योनि
में
मिसोप्रोस्टल
की
गोलियां
डालती
है। चार
घन्टे
के
अन्दर
घर पर ही
गर्भ
समाप्त
हो जाता
है।
गर्भ के
दौरान
जो
भ्रूण
या अन्य
टिशु
पैदा
हुए थे
वे योनि
द्वार
से बाहर
निकल
जाते
हैं।
16.
क्या
एबोरशन
पिल
हमेशा
डॉक्टर
की
देखरेख
में ही
लेना
चाहिए?
हां,
एबोरशन
पिल
हमेशा
डॉक्टर
की
देखरेख
में ही
लिया
जाना
जाहिए।
17.
एबौरशन
की
चिकित्सापरक
विधियों
से
जुड़े
खतरे
कोन से
हैं?
चिकित्सापरक
विधियों
से
सम्बन्धित
खतरों
में
शामिल
है।
- मिफेप्रिस्टोन,
मैथोट्रक्सेट
और
मिसोप्रोस्टाले
से
चक्कर
आते हैं
और
उल्टी
या
डायरिया
होता
है।
यदि
गर्भपात
पूरी
तरह न हो
तो
भ्रूण
को
शल्यक्रिया
द्वारा
निकालना
पड़ेगा।
भारी
रक्त
स्राव
हो सकता
है जो कि
सात
दिनों
तक चल
सकता है
ये ड्रग
आसानी
से
मिलते
नहीं और
महंगे
होते
हैं
18.
दूसरे
ट्रिमस्टर
में एम
टी पी के
लिए कौन
कौन सी
विधियां
काम में
ली जाती
हैं?
उन
में
चिकित्सापर
और
शल्यक्रिया
परक
विधियां
शामिल
हैं।
19.
दूसरे
ट्रिमस्टर
में
गर्भ का
पतन
करने के
लिए किन
चिकित्सापरक
विधियों
का
उपयोग
किया
जाता है?
चिकित्सापरक
विधि
में
प्रोस्टाग्लेन्डिन
सम्बन्धी
ड्रग्स
का
प्रयोग
किया
जाता है
जो कि
मुख से
या
इन्टरावेजनली
दिया
जाता है
या सीधे
गर्भशय
के
छिद्र
में
इंजैक्शन
द्वारा
पहुंचाया
जातै
है।
20.
चिकित्सापरक
विधियों
से कौन
से खतरे
जुड़े
रहते
हैं?
- खतरों
में
शामिल
हैं
- रोगी
को
अस्पताल
में
तीन
दिन तक
रहना
पड़ता
है
- इन्फैक्शन
(संक्रमण)
- बढ़ा
हुआ
रक्त
स्रावपदार्थों
का बच
रहना
जिन्हें
निकालने
के लिए
शल्य
क्रिया
की
जरूरत
पड़
सकती
है।
21.
दूसरे
ट्रिमस्टर
के गर्भ
का पतन
करने के
लिए
शल्य
क्रिया
परक किन
विधियों
की
जरूरत
होती है?
शल्य
चिकित्सापरक
विधियों
में
शामिल
हैं।
- एसपिरोटमी
- यह
विस्तृत
करके
निकाले
जाने
के
सामान
है।
- हिस्टरोटोमी
:
गर्भाशय
खोलकर
भ्रूण
को हटा
देना।
- हिस्टरोक्टोमी
: पूरे
गर्भाशय
को हटा
देना।
22.
गर्भपात
के
दीर्घकालिक
प्रभाव
क्या
होते
हैं?
गर्भपात
कराने
वाली
औरतों
को
चिन्ता
हो जाती
है कि इस
का
भविष्य
में
गर्भधारण
करने या
बच्चे
को
जन्मने
की उनकी
सामर्थ्य
में कमी
आ
जायेगी।
उन्हें
यह
जानकर
प्रसन्नता
होगी कि
अब
सामान्यतः
यह माना
जाता है
कि 12
हफ्ते
के गर्भ
में अगर
एक गर्भ
का पतन
कराया
जाए तो
भविष्य
में
गर्भ
धारम कर
पाने की
योग्यता
में कोई
कमी
नहीं
होती।
हाल ही
में
वर्ल्ड
हैल्थ
आरगनाइजेशन
द्वारा
कराये
गए एक
अध्ययन
से पता
चला है
कि जिन
औरतों
के दो-तीन
गर्भपात
कराये
जाते
हैं
उनके
प्राकृतिक
गर्भ
पतन की
अपरिपक्व
प्रसव
या जन्म
के समय
बच्चे
के कम
वजन की
आशंकाएं
दो तीन
गुना
बढ़
जाती
हैं।
|