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परिवार नियोजन की विधियों की जानकारी

परिवार नियोजन की विधियों की जानकारी भारत में सार्वभौम है, 99 प्रतिशत से अधिक महिलाएं किसी न किसी एक विधि की जानकारी रखती हैं। तथापि सभी आधुनिक विधियों की जानकारी केवल 49 प्रतिशत को ही प्राप्त है। सभी आधुनिक विधियों (नसबंदी और नलबंदी, आई यू डी, खाने वाली गोली और कण्डोम) की जानकारी रखने वाली महिलाओं का अनुपात राज्य वार अलग-अलग है - यह अनुपात मेघालय में 2 प्रतिशत से लेगर हिमाचल प्रदेश में 80 प्रतिशत तक है।

डी. एल. एच. एस. (2003-04) के अनुसार इस समय भारत में 15-44 वर्ष की आयु वाली विवाहित महिलाओं में से लगभग 53 प्रतिशत महिलाएं परिवार नियोजन की किसी न किसी एक विधि का प्रयोग करती है परन्तु उनमें से अधिकांश महिलाएं (35 प्रतिशत) परिवार नियोजन की स्थायी विधि अपना चुकी है। सर्वेक्षण से प्राप्त निष्कर्षों से यह पता चलता है कि कुछ क्षेत्रों में परिवार नियोजन संबंधी ऐसी आवश्यकताएं अभी भी काफी शेष हैं जिन्हें अभी पूरा करना है। गर्भनिरोधक की प्रचलित दर के जरिए जिलों के श्रेणीकरण और मानचित्रण से उन जिलों में अत्यधिक प्रभावी ढंग से कार्यक्रम पर ध्यान केन्द्रित करने में सहायता मिलती है जिन जिलों में गर्भनिरोधक का प्रचलन बहुत कम है।

जिलों के श्रेणीकरण और मानचित्रण (सामाजिक-आर्थिक विकास सूचकों पर आधारित) के अनुसार दंपत्ती संरक्षण दर तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय एवं राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग के लिए अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान द्वारा किए गए अध्ययन से यह पता चलता है कि श्रेणी में नीचे से 100 जिले अरूणाचल प्रदेश, बिहार (राज्य के 37 जिलों में से 29 जिलों), उत्तर प्रदेश और उ.पू. राज्यों से संबंध रखते हैं (तालिका देखें)।

  जिलेवार गर्भनिरोधक प्रचलन दर, भारत, 2003-04
   
  राज्य द्वारा परिवार नियोजन के लिए अनापूर्ति आवश्यकता 
(स्रोतः आर. सी. एच. एवं डी. एल. एच. एस. 2002-2004 अगस्त, 2006, में प्रकाशित)
   
  राज्य द्वारा परिवार नियोजन की विधियों का प्रचलित प्रयोग 
(स्रोतः आर. सी. एच. एवं डी. एल. एच. एस. 2002-2004 अगस्त, 2006 में प्रकाशित)
   
  प्रयोग की जा रही परिवार नियोजन की विधियाँ 
(स्रोतः भारत, आर. सी. एच. एवं डी. एल. एच. एस. 2002-04)
   
  
संयोगिक गर्भ और गर्भपात
  • 21 प्रतिशत गर्भ संयोगिक होते हैं जिसके कारण प्रति वर्ष 65 लाख गर्भपात किए जाते हैं।

  • यदि आपात गर्भ निरोधक गोलियों का प्रयोग समय पर किया जाए तो गर्भधारण करने से बचा जा सकता है।

  • आपात गर्भ निरोधक गोलियों को राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम में शामिल किया जाता है।

इसकी विस्तृत जानकारी लोगों को नहीं है।

 

 
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