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औरतों में जनन स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं
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माहवारी सम्बन्धी समस्याएं वल्वल पीड़ा और कष्ट
पीड़ा दायक माहवारी क्या होती है? वल्वल में पीड़ा और खुजली किस कारण होती है?
पीड़ादायक माहवारी का आप घर पर क्या उपचार कर सकते हैं? त्वचा के असंक्रामक रोग जो कि वल्वल को पीड़ा या कष्ट देते हैं उनके कारण क्या हो सकते हैं?
पीड़ादायक माहवारी के लिए डाक्टर से कब परामर्श लेना चाहिए? वल्वा की त्वचा के रोगों का उपचार कैसे करें?
माहवारी से पहले की स्थिति के क्या लक्षण हैं? वल्वल त्वचा की देखभाल महिला स्वयं कैसे करे?
पी.एम.एस. (माहवारी से पहले बीमारी) के कारण क्या हैं? वल्वा में सूजन का सबसे अधिक सामान्य कारण क्या है?
पी.एम.एस (माहवारी के पहले की बीमारी) का घर पर कैसे इलाज हो सकता है? बारथोलिन काइसटस का उपचार कैसे होता है?
माहवारी के स्राव को कब भारी माना जाता है?   प्रसूति परक नासूर (फिस्चुला)
भारी माहवारी के स्राव के सामाय कारण क्या हैं? प्रसूतिपरक नासूर क्या होता है?
लम्बा माहवारी पीरियड किसे कहते हैं? प्रसवपरक नासूर के कारण क्या होते हैं?
लम्बेमाहवारी पीरियड के सामान्य के कारण क्या हैं? क्या नासूर का उपचार हो सकता है?
अनियमित माहवारी पीरियड क्या होता है?  
किशोरावस्था के पहले कुछ वर्षों में अनियमित पीरियड़ होना क्या सामान्य बात है?   बाह्रोन्मुख (इकटोपिक) गर्भ
अनियमित माहवारी के कारण क्या है? बाह्रोन्मुख गर्भ क्या है?
सामान्य पांच दिन की अपेक्षा अगर माहवारी रक्त स्राव दो या चार दिन के लिए चले तो चिन्ता का कोई कारण होता है? बाह्रोन्मुख गर्भ के मुख्य लक्षण क्या हैं?
भारी, लम्बे और अनियमित पीरियड होने पर क्या करना चाहिए? बाह्रोन्मुख गर्भ का सन्देह होने पर क्या करें?
माहवारी का अभाव क्या होता है?  
    प्रजननेन्द्रिय में कैंसर
   असामान्य योनिक स्राव कैंसर क्या है?
योनिक स्राव क्या होता है और कब उसे असामान्य कहा जाता है। सुसाध्य ट्यूमर क्या होता है?
किन परिस्थितियों के कारण सामान्य योनिक स्राव में वृद्धि होती है? असाध्य ट्यूमर क्या होता है?
असामान्य योनिक स्राव के क्या कारण होते हैं?  
असामान्य योनिक स्राव से कैसे बचा जा सकता है?   ग्रीवा परक कैंसर
असामान्य योनिक स्राव के लिए क्या डाक्टर से सम्पर्क करना चाहिए? कौन सी महिला पर ग्रीवापरक कैंसर का खतरा बना रहता है?
  ग्रीवापरक कैंसर के लक्षण क्या हैं?
  अण्डकोष की पुष्टि क्या ग्रीवापरक कैंसर से बचा जा सकता है?
अण्डकोष की पुष्टि क्या होती है? ग्रीवा का स्मीयर (मैल) या पैप स्मीयर टैस्ट क्या होता है?
अण्डकोष की पुष्टि में क्या कैंसर की सम्भावना रहती है? स्मीयर टैस्ट किसे करवाना चाहिए?
अण्डकोष की पुष्टि के लक्षण क्या हैं? सम्भोग न करने वाली महिला को क्या स्मीयर टैस्ट करवाने की जरूरत होती है?
अण्डकोष की पुष्टि का उपचार क्या है? पैप स्मीयर कैसे किया जाता है?
पौलीकायस्टिक ओवरी सिन्डरोम (पी सी ओस) क्या होता है? स्मीयर टैस्ट करवाने का श्रेष्ठ समय कौन सा होता है?
पी सी ओस के लक्षण क्या हैं? ग्रीवा परक कैंसर से बचाव के लिए क्या कोई वैक्सीन उपलब्ध है?
पी सी ओस का उपचार क्या है? एच पी वी वैक्सीन किसे देना चाहिए?
  एच पी वी वैक्सीन कैसे दिया जाता है?
  अंग भ्रंश (प्रोलैप्स) शरीर पर उसके क्या प्रभाव हो सकते हैं?
अंग भ्रश क्या होता है? ग्रीवापरक कैंसर के लिए वैक्सीन पाने वाले हर किसी का क्या बचाव हो सकता है?
अंग भ्रंश के कारण क्या हैं?  
अंग भ्रंश के सामान्य लक्षण क्या हैं?   अण्डकोश का कैंसर
अंग भ्रंश के उपचार के लिए क्या विकास उपलब्ध हैं? किन महिलाओं को अण्डकोश का कैंसर होने का खतरा होता है?
  अण्डकोश के कैंसर के लक्षण क्या हैं?
  अण्डकोश के कैंसर के उपचार के क्या-क्या विकल्प हैं?
अण्डकोश के कैंसर से बचाव के लिए क्या कोई स्क्रीनिंगी टैस्ट है?

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माहवारी सम्बन्धी समस्याएं

पीड़ा दायक माहवारी क्या होती है?
पीड़ा दायक माहवारी मे निचले उदर में ऐंठनभरी पीड़ा होती है। किसी औरत को तेज दर्द हो सकता है जो आता और जाता है या मन्द चुभने वाला दर्द हो सकता है। इन से पीठ में दर्द हो सकता है। दर्द कई दिन पहले भी शुरू हो सकता है और माहवारी के एकदम पहले भी हो सकता है। माहवारी का रक्त स्राव कम होते ही सामान्यतः यह खत्म हो जाता है।

पीड़ादायक माहवारी का आप घर पर क्या उपचार कर सकते हैं?
निम्नलिखित उपचार हो सकता है कि आपको पर्चे पर लिखी दवाओं से बचा सकें। (1) अपने उदर के निचले भाग (नाभि से नीचे) गर्म सेक करें। ध्यान रखें कि सेंकने वाले पैड को रखे-रखे सो मत जाएं। (2) गर्म जल से स्नान करें। (3) गर्म पेय ही पियें। (4) निचले उदर के आसपास अपनी अंगुलियों के पोरों से गोल गोल हल्की मालिश करें। (5) सैर करें या नियमित रूप से व्यायाम करें और उसमें श्रेणी को घुमाने वाले व्यायाम भी करें। (6) साबुत अनाज, फल और सब्जियों जैसे मिश्रित कार्बोहाइड्रेटस से भरपूर आहार लें पर उसमें नमक, चीनी, मदिरा एवं कैफीन की मात्रा कम हो। (7) हल्के परन्तु थोड़े-थोड़े अन्तराल पर भोजन करें। (8) ध्यान अथवा योग जैसी विश्राम परक तकनीकों का प्रयोग करें। (9) नीचे लेटने पर अपनी टांगे ऊंची करके रखें या घुटनों को मोड़कर किसी एक ओर सोयें।

पीड़ादायक माहवारी के लिए डाक्टर से कब परामर्श लेना चाहिए?
यदि स्व-उपचार से लगातार तीन महीने में दर्द ठीक न हो या रक्त के बड़े-बड़े थक्के निकलते हों तो डाक्टर से परामर्श लेना चाहिए। यदि माहवारी होने के पांच से अधिक दिन पहले से दर्द होने लगे और माहवारी के बाद भी होती रहे तब भी डाक्टर के पास जाना जाहिए।

माहवारी से पहले की स्थिति के क्या लक्षण हैं?
माहवारी होने से पहले (पीएमएस) के लक्षणों का नाता माहवारी चक्र से ही होता है। सामान्यतः ये लक्षण माहवारी शुरू होने के 5 से 11 दिन पहले शुरू हो जाते हैं। माहवारी शुरू हो जाने पर सामान्यतः लक्षण बन्द हो जाते हैं या फिर कुछ समय बाद बन्द हो जाते हैं। इन लक्षणों में सिर दर्द, पैरों में सूजन, पीठ दर्द, पेट में मरोड़, स्तनों का ढीलापन अथवा फूल जाने की अनुभूति होती है।

पी.एम.एस. (माहवारी से पहले बीमारी) के कारण क्या हैं?
पी.एम.एस. का कारण जाना नहीं जा सका है। यह अधिकतर 20 से 40 वर्षों की औरतों में होता है, एक बच्चे की मां या जिनके परिवार में कभी कोई दबाव में रहा हो, या पहले बच्चे के होने के बाद दबाव के कारण कोई महिला बीमार रही हो- उन्हें होता है।

पी.एम.एस (माहवारी के पहले की बीमारी) का घर पर कैसे इलाज हो सकता है?
पी.एम.एस के स्व- उपचार में शामिल है- (1) नियमित व्यायाम - प्रतिदिन 20 मिनट से आधे घंटे तक, जिसमें तेज चलना और साईकिल चलाना भी शामिल है। (2) आहारपरक उपाय साबुत अनाज, सब्जियों और फलों को बढ़ाने तथा नमक, चीनी एवं कॉफी को घटाने या बिल्कुल बन्द करने से लाभ हो सकता है। (3) दैनिक डायरी बनायें या रोज का रिकार्ड रखें कि लक्षण कैसे थे, कितने तेज थे और कितनी देर तक रहे। लक्षणों की डायरी कम से कम तीन महीने तक रखें। इससे डाक्टर को न केवल सही निदान ढ़ंढने मे मदद मिलेगी, उपचार की उचित विधि बताने में भी सहायता मिलेगी। (4) उचित विश्राम भी महत्वपूर्ण है।

माहवारी के स्राव को कब भारी माना जाता है?
यदि लगातार छह घन्टे तक हर घंटे सैनेटरी पैड स्राव को सोख कर भर जाता है तो उसे भारी पीरियड कहा जाता है।

भारी माहवारी के स्राव के सामाय कारण क्या हैं?
भारी माहवारी स्राव के कारणों में शामिल है - (1) गर्भाषय के अस्तर में कुछ निकल आना। (2) जिसे अपक्रियात्मक गर्भाषय रक्त स्राव कहा जाता है। जिस की व्याख्या नहीं हो पाई है। (3) थायराइड ग्रन्थि की समस्याएं (4) रक्त के थक्के बनने का रोग (5) अंतरा गर्भाषय उपकरण (6) दबाव।

लम्बा माहवारी पीरियड किसे कहते हैं?
लम्बा पीरियड वह है जो कि सात दिन से भी अधिक चले।

लम्बेमाहवारी पीरियड के सामान्य के कारण क्या हैं?
(1)अण्डकोष में पुटि (2) कई बार कारण पता नहीं चलता तो उसे अपक्रियात्मक गर्भाषय रक्त स्राव कहते हैं (3) रक्त स्राव में खराबी और थक्के रोकने के लिए ली जाने वाली दवाईयां (4) दबाव के कारण माहवारी पीरियड लम्बा हो सकता है।

अनियमित माहवारी पीरियड क्या होता है?
अनियमित माहवारी पीरियड वह होता है जिसमें अवधि एक चक्र से दूसरे चक्र तक लम्बी हो सकती है, या वे बहुत जल्दी-जल्दी होने लगते हैं या असामान्य रूप से लम्बी अवधि से बिल्कुल बिखर जाते हैं।

किशोरावस्था के पहले कुछ वर्षों में अनियमित पीरियड़ होना क्या सामान्य बात है?
हां, शुरू में पीरियड अनियमित ही होते हैं। हो सकता है कि लड़की को दो महीने में एक बार हो या एक महीने में दो बार हो जाए, समय के साथ-साथ वे नियमित होते जाते हैं।

अनियमित माहवारी के कारण क्या है?
जब पीरियड असामन्य रूप में जल्दीर-जल्दी होते हैं तो उनके कारण होते हैं- (1) अज्ञात कारणों से इन्डोमिट्रोसिस हो जाता है जिससे जननेद्रिय में पीड़ा होती है और जल्दी-जल्दी रक्त स्राव होता है। (2) कभी-कभी कारण स्पष्ट नहीं होता तब कहा जाता है कि महिला को अपक्रियात्मक गर्भाषय रक्तस्राव है। (3) अण्डकोष की पुष्टि (4) दबाव।

सामान्य पांच दिन की अपेक्षा अगर माहवारी रक्त स्राव दो या चार दिन के लिए चले तो चिन्ता का कोई कारण होता है?
नहीं, चिन्ता की कोई जरूरत नहीं। समय के साथ पीरियड का स्वरूप बदलता है, एक चक्र से दूसरे चक्र में भी बदल जाता है।

भारी, लम्बे और अनियमित पीरियड होने पर क्या करना चाहिए?
(1) माहवारी चक्र का रिकॉर्ड रखें- कब खत्म हुए, कितना स्राव हुआ (कितने पैड में काम में आए उनकी संख्या नोट करें और वे कितने भीगे थे) और अन्य कोई लक्षण आप ने महसूस किया हो तो उसे भी शामिल करें। (2) यदि तीन महीने से ज्यादा समय तक समस्या चलती रहे तो डाक्टर से परामर्श करें।

माहवारी का अभाव क्या होता है?
यदि 16 वर्ष की आयु तक माहवारी न हो तो उसे माहवासी अभाव कहते हैं। कारण है- (1) औरत के जनन तंत्र में जन्म से होने वाला विकास (2) योनि (योनिच्छद) के प्रवेशद्वारा की झिल्ली में रास्ते की कमी (3) मस्तिष्क की ग्रन्थियों में रोग।

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असामान्य योनिक स्राव

योनिक स्राव क्या होता है और कब उसे असामान्य कहा जाता है।
ग्रीवा से उत्पन्न श्लेष्मा (म्युकस) का बहाव योनिक स्राव कहलाता है। अगर स्राव का रंग, गन्ध या गाढ़ापन असामान्य हो अथवा मात्रा बहुत अधिक जान पड़े तो हो सकता है कि रोग हो।

किन परिस्थितियों के कारण सामान्य योनिक स्राव में वृद्धि होती है?
सामान्य योनिक स्राव की मात्रा में निम्नलिखित स्थितियों में वृद्ध हो सकती है- योनपरक उत्तेजना, भावात्मक दबाव और अण्डोत्सर्ग (माहवारी के मध्य में जब अण्डकोष से अण्डे का सर्जन और विसर्जन होता है)

असामान्य योनिक स्राव के क्या कारण होते हैं?
असामान्य योनिक स्राव के ये कारण हो सकते हैं- (1) योन सम्बन्धों से होने वाला संक्रमण (2) जिनके शरीर की रोधक्षमता कमजोर होती है या जिन्हें मधुमेह का रोग होता है उनकी योनि में सामान्यतः फंगल@यीस्ट नामक संक्रामक रोग हो सकता है।

असामान्य योनिक स्राव से कैसे बचा जा सकता है?
योनिक स्राव से बचने के लिए - (1) जननेन्द्रिय क्षेत्र को साफ और शुष्क रखना जरूरी है। (2) योनि को बहुत भिगोना नहीं चाहिए (जननेन्द्रिय पर पानी मारना) बहुत सी महिलाएं सोचती हैं कि माहवारी या सम्भोग के बाद योनि को भरपूर भिगोने से वे साफ महसूस करेंगी वस्तुतः इससे योनिक स्राव और भी बिगड़ जाता है क्योंकि उससे योनि पर छाये स्वस्थ बैक्टीरिया मर जाते हैं जो कि वस्तुतः उसे संक्रामक रोगों से बचाते हैं (3) दबाव से बचें। (4) योन सम्बन्धों से लगने वाले रोगों से बचने और उन्हें फैलने से रोकने के लिए कंडोम का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए। (5) मधुमेह का रोग हो तो रक्त की शर्करा को नियंत्रण में रखाना चाहिए।

असामान्य योनिक स्राव के लिए क्या डाक्टर से सम्पर्क करना चाहिए?
हां, शीघ्र ही डाक्टर से परामर्श लेना चाहिए। वे आपके लक्षणों की जानकारी लेंगे, जननेन्द्रिय का परीक्षण करेंगे और तदनुसार उपचार बतायेंगे।

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अण्डकोष की पुष्टि

अण्डकोष की पुष्टि क्या होती है?
अण्डकोष के अन्दर या ऊपर जब सूजन हो जाती है या कुछ उग आता है तो उसे अण्डकोष की पुष्टि कहते हैं यह सख्त भी हो सकती है और तरल भी।

अण्डकोष की पुष्टि में क्या कैंसर की सम्भावना रहती है?
अण्डकोष मे उग आने वाले पदार्थ अधिकतर कैंसर के नहीं होते।

अण्डकोष की पुष्टि के लक्षण क्या हैं?
अण्डकोष की पुष्टि के निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं- (1) अण्डकोष की पुष्टि में अधिकतर औरतों को किन्हीं लक्षणों की अनुभूति नहीं होती, विशेषकर अगर वे छोटे हों। (2) कुछ पुटियां बड़ी हो जाती हैं तो हो सकता है कि उदर में सूजन पैदा करें। (3) पुष्टि कहां पर है, कितनी बड़ी है उसके अनुसार ही मूत्राशय या मल पर दबाव पड़ता है और हो सकता है कि आपको जल्दी-जल्दी (टायलेट) शौचालय में जाना पड़े। (4) आपको पेट में कुछ कष्ट हो सकता है और सम्भोग भी कष्टदायक या पीड़ा भरा हो सकता है। (5) इसका पीरियड पर भी प्रभाव पड़ सकता है, रक्त स्राव अनियमित हो सकता है, पहले के सामान्य प्रवाह से भारी या हल्का हो सकता है। (6) चेहरे या शरीर पर अधिक बाल आ सकते हैं। (7) आवाज भारी हो सकती है।

अण्डकोष की पुष्टि का उपचार क्या है?
कभी-कभी पुष्टि बनती है और अपने आप गायब भी हो जाती है जबकि कभी-कभी उसे शल्यक्रिया द्वारा निकालना पड़ सकता है। आपका डाक्टर आपको उसकी सभी सम्भावनाओं के सम्बन्ध में समझाएगा।

पौलीकायस्टिक ओवरी सिन्डरोम (पी सी ओस) क्या होता है?
पौलीकायस्टिक का सामान्य अर्थ है ^बहुत सी पुटियां^ जो कि अल्टरासाऊण्ड स्कैन से अण्डकोष पर दिख जाती है।

पी सी ओस के लक्षण क्या हैं?
पी सी ओस के लक्षणों में शामिल है- (1) पीरियड की अनियमितता या बिल्कुल न होना (2) अनउर्वरकता (3) शरीर पर अनपेक्षित बाल (4) मुंहासे (5) वजन बढ़ना (6) पेट में तकलीफ।

पी सी ओस का उपचार क्या है?
पी सी ओस का उपचार हॉरमोन परक दवाओं या शल्यक्रिया द्वारा हो सकता है। उपचार किस प्रकार किया जाए इसका निर्णय डाक्टर कर सकता है।

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अंग भ्रंश (प्रोलैप्स)

अंग भ्रश क्या होता है?
अण्डाशय, ब्लैडर (मूत्राशय), मूत्रमार्ग और मलाशय जैसे जननेन्द्रि सम्बन्धी अंगों का योनि मे गिर जाने का अर्थ है अंग भ्रंश।

अंग भ्रंश के कारण क्या हैं?
जननेन्द्रिय की मांसपेशियों में कमजोरी के कारण अंग भ्रंश होता है- जो कि (1) बार-बार बच्चे के जन्म (2) वृद्दावस्था (3) फ्राइब्रायड के कारण मत्राशय मे थक्के आ जाने से (4) मोटापे या (5) रीढ़ की हड्डी में घाव होने से हो जाती है।

अंग भ्रंश के सामान्य लक्षण क्या हैं?
हर प्रकार के अंग भ्रंश में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं- (1) जननेन्द्रिय में भारीपन का बोध होता है या लगता है कि वहां कुछ उग आया है (2) पीठ के निचले भाग में दर्द होता है जो किलेटने पर ठीक हो जाता है। (3) पेट के निचले भाग मे दर्द या दबाव (4) सम्भोग के समय पीड़ा या बेहोशी (5) मूत्र प्रवाह को रोक पान में असमर्थता या बहता मूत्र।

अंग भ्रंश के उपचार के लिए क्या विकास उपलब्ध हैं?
थोड़े से अंग भ्रंश का उपचार इन साधनों से हो सकता है- (1) जननेन्द्रिय का व्यायाम (2) गिरे हुए अंग को उसके स्थान पर रखने के लिए जननेन्द्रिय में पेसरी डालना। अंग भ्रंश की गम्भीर स्थिति में अनेक प्रकार की शल्य क्रियाएं ही उसका समाधान कर पाती है।

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वल्वल पीड़ा और कष्ट

वल्वल में पीड़ा और खुजली किस कारण होती है?
वल्वल क्षेत्र में पीड़ा खुजली, जलन एवं उत्तेजना का कारण जननेन्द्रिय में संक्रमण (इनफैक्शन) हो सकता है या डरमैटईटिस, एक्जीमा जैसी त्वचा के असंक्रमाक रोग हो सकते हैं।

त्वचा के असंक्रामक रोग जो कि वल्वल को पीड़ा या कष्ट देते हैं उनके कारण क्या हो सकते हैं?
औरत की वल्वा में त्वचा परक ऐसा रोग भी हो सकता है जो कि संक्रामक नही होता और सम्भोग के साथी को नहीं लगाता। जांघिए को धोने के लिए जो साबुन, दुर्गन्धनाशक और प्रक्षालक काम में लाया जाता है उससे जलन की बहुत सम्भावना रहती है।

वल्वा की त्वचा के रोगों का उपचार कैसे करें?
उपचार के लिए सामान्यतः ऐसी स्टीरॉयड क्रीम एवं प्रशासक औषधियों का उपयोग किया जाता है जो कि चिकनी हो और ऐसा मरहम लिया जाता है जो कि त्वचा को उत्तजित करने वाला न हो। जख्म को और फटी चमड़ी को नरम बनाने और आराम दिलाने के लिए इनका उपयोग किया जा सकता है और वल्वा की सफाई के लिए साबुन की जगह इनका उपयोग कर सकते हैं। क्रीम और लोशन के रूप में ये मिलते हैं और कैमिस्ट से बिना पर्ची लिखाये भी मिल जाती हैं।

वल्वल त्वचा की देखभाल महिला स्वयं कैसे करे?
यदि आपको यह समस्या है, या उसका अंदेशा है तो तंग माप के टाईटस या ट्राउसर मत पहनें। सिनथैटिक के जांघिये न पहने और कॉटन के भी ऐसे जांघिए पहने जो बहुत कसे हुए न हो। त्वचा को साफ करने के लिए हल्के साबुन का इस्तेमाल करें।

वल्वा में सूजन का सबसे अधिक सामान्य कारण क्या है?
वल्वा में सूजन के सबसे सामान्य कारण को बारथोलिनस काइसटस कहा जाता है। बारथोलिन ग्रन्थियां बहुत ही छोटी दो ग्रन्थियां हैं जो कि योनि द्वार के दोनों ओर होती हैं। उस ग्रन्थि मे छोटी नलिया होती हैं अगर वे त्वचा के अणु या स्राव से बन्द हो जायें तो उसमें पुष्टि बन सकती है (तरल द्रव्य से भरी थैली) यह पुष्टि मटर के ्दाने ्से लेकर गोल्फ की बॉल जैसी हो सकती है।

बारथोलिन काइसटस का उपचार कैसे होता है?
उपचार बहुत सी बातों पर निर्भर रहता है, पुष्टि का आकार, कितना पीड़दायक है, क्या संक्रमित है और आप का डाक्टर कौन सी उपचार विधि को चुनता है। कुछ तो एनटिवॉयटिक खाने मात्र से ठीक हो जाते हैं। कभी-कभी डाक्टर उसमें एक नली डालने का निश्चय कर सकते हैं। (मोटे धोग जैसी) वह नली 2 से 4 हफ्ते तक उसी जगह पर रहती है। इससे तरल पदार्थ बाहर बह जाता है और इससे योनि के दोनों पक्षों पर एक छोटा सा छेद हो जाता है 2-4 हफ्ते में उस नली को निकाल दिया जाता है।

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प्रसूति परक नासूर (फिस्चुला)

प्रसूतिपरक नासूर क्या होता है?
महिला के जननेन्द्रिय मार्ग और एक या एक से अधिक आन्तरिक अंगों के बीच के छिद्र को नासूर कहते हैं। कई दिन तक प्रसव के अवरोध के कारण यह छेद हो जाता है, जब बच्चे के सिर का दबाव मां की जननेन्द्रिय क्षेत्र को कोमल अणुओं/टिशुओं को जाने वाले रक्त की आपूर्ति को काट देती है। मृत टिशु गिर जाते हैं और महिला की योनि और मूत्राशय के बीच होता है। उस छिद्र से मूत्र अथवा मल का सदा बहाव होता रहता है।

प्रसवपरक नासूर के कारण क्या होते हैं?
प्रसवपरक नासूर उस अवरूद्ध प्रसव का परिणाम होता है जिसे बिना उपचार और बिना निकाले छोड़ दिया जाता है। नासूर के पनपने में तीन प्रकार के विलम्ब कारण बन सकते हैं। प्रसव के समय चिकित्सक की देखरेख पाने में विलम्ब, मैडिकल सुविधा प्राप्ति में विलम्ब और स्वास्थ्य परक सुविधा तक पहुंचने के बाद भी देखभाल पाने में विलम्ब।

क्या नासूर का उपचार हो सकता है?
हां, प्रसूति नासूर को जननांगों की शल्यक्रिया द्वारा बन्द किया जा सकता है। यदि यह शल्यक्रिया किसी कौशल प्रवीण शल्यचिकित्सक द्वारा की जाए तो नासूर के रोगियों के पुनः सामान्यः जीवन जी पाने की अच्छी सम्भावनाएं रहती हैं और शरीर की गतिविधियों पर पूरा नियंत्रण भी पा सकते हैं। ऐसे ऑपरेशन की सफलता दर 93 प्रतिशत है।

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बाह्रोन्मुख (इकटोपिक) गर्भ

बाह्रोन्मुख गर्भ क्या है?
बाह्रोन्मुख गर्भ वह जिसमें उर्वरित अण्डे का रोपण किया जाता है और जो गर्भाशय के बाहर विकसित होता है। सामान्यतः ट्यूब मे होता है। प्राकॉतिक रूप में ट्यूब में उसका उर्वरण होता है और फिर वह उर्वरित अण्डा गर्भाशय में जाता है परन्तु नली (ट्यूब) में होने वाले गर्भ में वह ट्यूब में ही रहता है।

बाह्रोन्मुख गर्भ के मुख्य लक्षण क्या हैं?
चार मुख्य लक्षण हैं-

  1. अल्पावधि के पीरियडस का अभाव (एमीनोरहोई)

  2. पेट में तेज दर्द

  3. योनि से रक्त स्राव

  4. चक्कर आना, उल्टी होना और बहोशी के दौरे।

बाह्रोन्मुख गर्भ का सन्देह होने पर क्या करें?
महिला को तुरन्त अस्पताल पहुंचाना चाहिए। गम्भीर बाह्रोन्मुख गर्भ के उपचार का सिद्धान्त है - एक ही समय में शल्यचिकित्सा और पुनः बहाली हो। जरूरत पड़ने पर रक्त भी चढ़ाया जाता है। शल्यक्रिया जल्दी हो जाने से रक्त स्राव रूक जाता है और रोगी की स्थिति में सुधार आ जाता है।

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प्रजननेन्द्रिय में कैंसर

कैंसर क्या है?
कैंसर शरीर की आधारभूत इकाई कोशिका (सेल) को प्रभावित करता है। जब कोशिकाएं असामान्य हो जाती है और अनियंत्रित रूप में विभाजित होती जाती है तब कैंसर होता है। अतिरिक्त मज्जा का यह टुकड़ा फोड़ा या ट्यूमर कहलाता है जो कि सुसाध्य और असाध्य दोनों प्रकार का हो सकता है।

सुसाध्य ट्यूमर क्या होता है?
सुसाध्या ट्यूमर कैंसर वाले नहीं होते। सामान्यतः उन्हें निकाला जा सकता है और वे वापिस नहीं आते। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुसाध्य ट्यूमर की कोशिकाएं शरीर के अन्य भागों में फैलती नहीं।

असाध्य ट्यूमर क्या होता है?
असाध्य ट्यूमर ही कैंसर होते हैं। कैंसर के सैल कोशिकाओँ में प्रवेश कर सकते हैं और उन्हें तथा ट्यूमर के आसपास के अंगों को नष्ट कर सकते हैं। असाध्य ट्यूमर से कैंसर के सैल विघटित होकर रक्त प्रवाह में शामिल हो सकते हैं और सारे शरीस में फैल सकते हैं।

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ग्रीवा परक कैंसर

कौन सी महिला पर ग्रीवापरक कैंसर का खतरा बना रहता है?
जिन महिलाओं को ग्रीवा परक कैंसर का खतरा रहता है वे हैं (1) जिनके सम्भोग के कई साथी होते हैं (2) जो किशोरावस्था या बीस वर्ष की कम आयु से यौनपरक सम्भोग शुरू कर देती हैं। (3) जिनकी जननेन्द्रिय पर मस्से रह चुके हों या यौन सम्बन्धों से फैलने वाले संक्रामक रोगों से लम्बे समय से ग्रस्त हों।

ग्रीवापरक कैंसर के लक्षण क्या हैं?
प्रारम्भिक स्थिति में, ग्रीवापरक कैंसर के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। लक्षण तब दिखते हैं जब कैंसर के सैल आसपास की कोशिकाओं में घुसना शुरू कर देते हैं। सबसे सामान्य लक्षण हैं- असामान्य स्राव। नियमित माहवारी पीरियडस के बीच रक्तस्राव शुरू हो सकता है या खत्म हो सकता है अथवा यौन सम्भोग के बाद भी हो सकता है। माहवारी रक्तस्राव पहले की अपेक्षा लम्बी अवधि तक हो सकता है और सामान्य से भारी हो सकता है। योनि से होने वाले स्राव का बढ़ जाना ग्रीवा परक कैंसर का एक कारण होता है। ये लक्षण कैंसर के भी हो सकते हैं एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी किसी अन्य समस्या के कारण भी हो सकते हैं। डाक्टर ही सही कारण बता पाते हैं। अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई पड़े तो महिला के पास जाना जरूरी होता है।

क्या ग्रीवापरक कैंसर से बचा जा सकता है?
हां, बचा जा सकता है, यदि हम ग्रीवा से होने वाले स्राव स्मीयर या पांप स्मीयर का नियमित टेस्ट करवाते रहें तो ग्रीवा में होने वाले बदलाव का जल्दी पता चल जायेगा जिससे इलाज सम्भव है।

ग्रीवा का स्मीयर (मैल) या पैप स्मीयर टैस्ट क्या होता है?
महिला की ग्रीवा के स्वास्थ्य का परीक्षण करने के लिए यह एक सरल सा परीक्षण है। इसे स्पीयर टैस्ट इसलिए कहते हैं कि डाक्टर या नर्स ग्रीवा से थोड़ा सा सैम्पल लेते हैं और उसे शीशे की स्लाइड पर (स्मीयर) पोत देते हैं ताकि माइक्रोस्कोप से उसका अध्ययन कर सकें।

स्मीयर टैस्ट किसे करवाना चाहिए?
सम्भोग करने वाली महिलाओं को हर 3 से 5 साल के भीतर स्मीयर टैस्ट करवाना चाहिए।

सम्भोग न करने वाली महिला को क्या स्मीयर टैस्ट करवाने की जरूरत होती है?
सम्भोग न करने वाली महिलाओं में ग्रीवा परक कैंसर अत्यन्त दुर्लभ है इसलिए अधिकांश संस्तुतियां यही कहती है कि सम्भोग के बिना महिला को इस टैस्ट की जरूरत नहीं।

पैप स्मीयर कैसे किया जाता है?
हल्का गर्म वक्ष्ण यन्त्र योनि में डाला जाता है ताकि दोनों दीवारों को अलग करके डाक्टर ग्रीवा को देख सके। लकड़ी की चिमटी (जिह्ववा दबाने वाली चिमटी से भी पतली) को ग्रीवा में घुमाया जाता है और स्मीयर को शीशे की पट्टी पर डाल दिया जाता है।

स्मीयर टैस्ट करवाने का श्रेष्ठ समय कौन सा होता है?
एक पीरियड से दूसरे पीरियड के ठीक आधे या बीचों बीच वाले दिन यह टैस्ट करवाना सबसे श्रेष्ठ है। इस समय ग्रीवा से सैल का सैम्पल लेना बड़ा सरल होता है।

ग्रीवा परक कैंसर से बचाव के लिए क्या कोई वैक्सीन उपलब्ध है?
हां, ग्रीवा परक कैंसर के 70 प्रतिशत रोगियों को होने वाले हॉरमुन पैपिल्लोमा नामक वाइकस से बचाव के लिए अब (एच पी वी) वैक्सीन उपलब्ध हो गई है।

एच पी वी वैक्सीन किसे देना चाहिए?
यह वैक्सीन 9 से 26 वर्ष की आयु की लड़कियों और महिलाओं के लिए होता है। वाइरस होने से पहले दिए जाने पर यह काम करता है।

एच पी वी वैक्सीन कैसे दिया जाता है?
यह वक्सीन तीन महीने में इंजैक्शन द्वारा दी जाती है।

शरीर पर उसके क्या प्रभाव हो सकते हैं?
इसमें दर्द, सूजन, खुजली, इंजैक्शन वाली जगह पर लाली, बुखार चक्कर और घबराहट हो सकती है।

ग्रीवापरक कैंसर के लिए वैक्सीन पाने वाले हर किसी का क्या बचाव हो सकता है?
हो सकता है कि यह वैक्सीन हर किसी को बचा न सके और ग्रीवा पर कैंसर के सभी प्रकारों का इससे बचाव नहीं होता, इसलिए नियमित रूप से इसका परीक्षण होते रहना जरूरी है।

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अण्डकोश का कैंसर

किन महिलाओं को अण्डकोश का कैंसर होने का खतरा होता है?
अण्डकोश के कैंसर के निश्चत कारणों की जानकारी नहीं है। फिर भी, शोधकार्यों से पता चलता है कि निम्नलिखित कारण रोग की सम्भावनाओं को बढ़ा सकते हैं। (1) पारिवारिक इतिहासः जिस महिला के प्रथम सम्बन्धी (मां, बहन, बेटी) अण्डकोश के कैंसर रोग से ग्रस्त रह चुकी हो उन्हें यह रोग हो जाने का बड़ा खतरा रहता है। (2) आयुः आयु वृद्धि के साथ ही इसकी सम्भावनाएं बढ़ती हैं। सामान्यतः अण्डकोश के कैंसर पचास वर्ष से ऊपर की महिलाओं को होते हैं, साठ से ऊपर वालों को सबसे अधिक खतरा रहता है। (3)जिन महिलाओं की कोई सन्तान नहीं होती उन्हें इस कैंसर की सम्भावना अधिक अधिक रहती है।

अण्डकोश के कैंसर के लक्षण क्या हैं?
अण्डकोश के कैंसर के लक्षण वही हैं जो कि अण्डकोश की सुसाध्य स्थितियों के होते हैं जैसे कि माहवारी में बाधा, पेट में बेआरामी। कभी-कभी लक्षण अस्पष्ट भी हो सकते हैं जैसे कि दस्त लगना या वजन घटना आदि। इसलिए डाक्टर के पास नियमित रूप से जाते रहना चाहिए।

अण्डकोश के कैंसर के उपचार के क्या-क्या विकल्प हैं?
अण्डकोश के कैंसर वाले रोगियों के लिए उपचार के विकल्प और परिणाम इस पर निर्भर रहते हैं कि निदान से पहले वह किस प्रकार का कैंसर था और कितना फैल चुका था।

अण्डकोश के कैंसर से बचाव के लिए क्या कोई स्क्रीनिंगी टैस्ट है?
अण्डकोश के कैंसर का प्रारम्भिक स्थिति में ही निदान कर पाने वाला कोई स्क्रीनिंग टैस्ट अभी तक नहीं बना है।
 

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