एच.
आई. वी./एड्स
एवं
जनसंख्या
हमें
जनसंख्या
कार्यक्रम
में एच.
आई. वी./एड्स
विषय पर
ध्यान
केन्द्रित
क्यों
करना
चाहिए?
वे
युवा
पुरूष
और
महिलाएं
जो अति
कामुक
होते
हैं और
देश के
लिए
मजदूर
पैदा
करते
हैं। वे
एच. आई.
वी/एड्स
के
प्रति
अति
संवेदनशील
होते
हैं।
प्रत्येक
14
सेकेण्ड
में एक
युवा
व्यक्ति
एच. आई.वी/एड्स
से
संक्रमित
हो जाता
हैं और
संयुक्त
राष्ट्र
जनसंख्या
कोष यू.
एन. एफ.
पी ए),
विश्व
जनसंख्या
रिपोर्ट
2003 की
स्थिति
के
अनुसार,
विश्वभर
में एच.
आई. वी.
संक्रमण
के नए
रोगियों
में से
लगभग
आधे
रोगी
युवा
वर्ग के
होते
हैं
जिनमें
महिलाओं
की
संख्या
अधिक
होती
है।
युवा
वर्ग
में
उच्च
मृत्युदर
होने के
परिणामस्वरूप
उत्पादन
कारी
श्रमिकों
का
समाप्त
होना और
आश्रितों-बच्चों
और
बुजुर्गों
की
संख्या
में
वृद्धि
होना
है।
इससे
अत्यंत
गरीबी
फैलेगी
स्वास्थ्य
खराब
होगा और
आर्थिक
ह्रास
होगा।
चूंकि
जनसंख्या
कार्यक्रम
का
अंतिम
उद्देश्य
लोगों
के जीवन
स्तर
में
सुधार
लाना है,
न कि
मात्र
जनसंख्या
कम
करना।
इसलिए
एच. आई.
वी. एड्स
की
रोकथाम
करना
जनसंख्या
कार्यक्रमों
का एक
महत्वपूर्ण
अंग बन
जाता
है।
मृत्युदर
कम करके
और
जननक्षमता
को
सीमित
करके
विश्वव्यापी
जनसंख्या
वृद्धि
को कम
किया
गया है न
कि
लोगों
को
बीमारी
का
शिकार
बनाकर।
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