होम  -  जनसंख्या के मूल सिद्धांत  -  सरलीकृत जनसंख्या अवधारणा  -  एच. आई. वी. / एड्स एवं जनसंख्या
पर्यवलोकन
जे.एस.के.  के कार्य
जे.एस.के.  किस प्रकार भिन्न है?
जे.एस.के.  की निधि
सदस्यता का पंजीकरण
दान और अंशदान
जिला स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े
  

विश्व की जनसंख्या

भारत की जनसंख्या

जनसंख्या का विषय
 महत्वपूर्ण क्यों है ?
सरलीकृत जनसंख्या की अवधारणा
- पर्यवलोकन
- जनसांख्यिक संक्रमण
- भारत की जनसंख्या
- क्या जनसंख्या एक समस्या है?
- लिंग अनुपात और जनसंख्या
- विकास और जनसंख्या
- गरीबी और जनसंख्या
- लिंग और जनसंख्या
- बाल स्वास्थ्य और जनसंख्या
- गर्भ निरोध और जनसंख्या
- युवा और जनसंख्या
- एच. आई. वी./एड्स एवं जनसंख्या
सरकार के प्रचलित कार्यक्रम
जनसंख्या से संबंधित संपर्क

यौन और जनन स्वास्थ्य पर 
प्राय पूछे जाने वाले प्रश्नः

सीधे उत्तर

एच. आई. वी./एड्स एवं जनसंख्या

हमें जनसंख्या कार्यक्रम में एच. आई. वी./एड्स विषय पर ध्यान केन्द्रित क्यों करना चाहिए?
वे युवा पुरूष और महिलाएं जो अति कामुक होते हैं और देश के लिए मजदूर पैदा करते हैं। वे एच. आई. वी/एड्स के प्रति अति संवेदनशील होते हैं। प्रत्येक 14 सेकेण्ड में एक युवा व्यक्ति एच. आई.वी/एड्स से संक्रमित हो जाता हैं और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष यू. एन. एफ. पी ए), विश्व जनसंख्या रिपोर्ट 2003 की स्थिति के अनुसार, विश्वभर में एच. आई. वी. संक्रमण के नए रोगियों में से लगभग आधे रोगी युवा वर्ग के होते हैं जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक होती है।

युवा वर्ग में उच्च मृत्युदर होने के परिणामस्वरूप उत्पादन कारी श्रमिकों का समाप्त होना और आश्रितों-बच्चों और बुजुर्गों की संख्या में वृद्धि होना है। इससे अत्यंत गरीबी फैलेगी स्वास्थ्य खराब होगा और आर्थिक ह्रास होगा। चूंकि जनसंख्या कार्यक्रम का अंतिम उद्देश्य लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है, न कि मात्र जनसंख्या कम करना। इसलिए एच. आई. वी. एड्स की रोकथाम करना जनसंख्या कार्यक्रमों का एक महत्वपूर्ण अंग बन जाता है।

मृत्युदर कम करके और जननक्षमता को सीमित करके विश्वव्यापी जनसंख्या वृद्धि को कम किया गया है न कि लोगों को बीमारी का शिकार बनाकर।

 

 

 

 

 

 

 
New Page 2

 © प्रतिलिपि अधिकार 2007,  जनसंख्या स्थिरता कोष , सर्वाधिकार सुरक्षित

 

(पिछला अद्यतनीकृतः 15.01.2008)