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भारत की जनसंख्या

भारत की 2001 में की गई जनगणना के अनुसार देश की जनसंख्या 1.028 बिलियन थी। यह अनुमान लगाय गया है कि भारत की जनसंख्या में प्रतिवर्ष लगभग 180 लाख-ऑस्ट्रेलिया के आकार के समान, की वृद्धि होती रहेगी। भारत की जनसंख्या 2050 तक 1.53 बिलियन हो जाएगी। तब भारत विश्व का सबसे अधिक आबादीवाला देश होगा क्योंकि 2050 तक चीन की जनसंख्या अनुमानतः लगभग 1.39 बिलियन होगी।

जनसंख्या स्थिरीकरण का क्या आशय है?
जनसंख्या स्थिरीकरण एक वह स्तर है जहां जनसंख्या में कोई परिवर्तन नहीं होता। इसे शून्य जनसंख्या वृद्धि स्तर भी कहा जाता है। विश्व की जनसंख्या को उस समय स्थिर कहा जाता है जब जन्म और मृत्यु दर समान हो जाती है। तथापि कुछ विशिष्ट देशों के मामलों में भी देश में आने वाले और देश से जाने वाले लोगों की जनसंख्या में गणना की जाती है। देश में जनसंख्या का स्तर उस समय स्थिर कहा जाता हैं जब देश में जन्मे बच्चों तथा बाहर से आने वालों की संख्या देश में मरने वालों तथा देश से बाहर जाने वालों की संख्या के बराबर हो जाती है।

जनसंख्या स्थिती करण के लिए यह आवश्यक है कि देश में जन्म लेने वालों और मरने वालों की संख्या बराबर होनी चाहिए अर्थात यदि एक बच्चा जन्म लेता है तो एक व्यक्ति को मरना चाहिए। लेकिन ऐसे अधिकांश जवान दंपत्ती हैं जिनके परिवार में जितने बूढ़े लोग मरते हैं उससे अधिक बच्चे पैदा होते हैं, जिससे जनसंख्या निरंतर बढ़ती रहती है। यह जनसंख्या संवेग कहा जाता है।

इस प्रकार जननक्षमता का प्रतिस्थापन स्तर (प्रति दंपत्ती 2 बच्चे) प्राप्त करने और जनसंख्या स्थिरता के मध्य प्रायः कई दशकों का अंतर आ जाता है। भारत नें 2010 तक जननक्षमता का प्रतिस्थापन स्तर प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है ताकि वह जनसंख्या स्थितीकरण के वृहत लक्ष्य को सन् 2045 तक प्राप्त कर सके - इस 35 वर्ष के अंतर को जनसंख्या संवेग के लिए माना जाएगा।

जनसंख्या इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है जबकि प्रति महिला बच्चों की औसतन संख्या कम हो रही है?
भारत में प्रतिवर्ष लगभग 180 लाख जनसंख्या बढ़ जाती है क्योंकि यहां कुल जनसंख्या की लगभग 50 प्रतिशत जनसंख्या जनन आयु वर्ग की है। युवाओं की संख्या अधिक होने के कारण जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है इसके अतिरिक्त पूर्ववर्ती वर्षों की उच्च जन्म दर होने के कारण जनन आयु वर्ग में आने वाले लोगों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ रही है।

देर से शादी करके तथा बच्चा देर से पैदा करके और दो बच्चों के जन्म के बीच पर्याप्त अंतर रख कर के इस जनसंख्या संवेग को रोका जा सकता है।

जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करने वाले कौन से तथ्य हैं?
प्राकृतिक वृद्धि जन्म और मृत्यु की संख्या के बीच अंतरदर्शाती हैं। देश में मृत्यु दर कम हो रही है परन्तु जन्म दर ऊँची बनी हुई है। जन्म दर ऊँची होने के दो तथ्य हैं :

पहला तथ्य है अवांछित और अनायोजित जनन-क्षमता गर्भनिरोध सेवा केन्द्रों तक पहुंच पाने के अभाव के कारण जो बच्चे पैदा होते है वे भी अनावश्यक कहलाते हैं। औसतन प्रति महिला तीन और तीन से अधिक संख्या में जन्मे बच्चे, प्रति वर्ष जन्म लेने वाले 260 लाख बच्चों से में 45 प्रतिशत होते हैं।

दूसरा घटक बड़े परिवार ("वांछित जननक्षमता" कहा जाता है) की इच्छा होना है, इसके पीछे सामाजिक सांस्कृतिक कारण, विशेषतः पुत्र के लिए वरीयता और उच्च शिशु मृत्यु दर का होना हैं ऐसे बच्चे कुल जन्मे बच्चों में से 20 प्रतिशत होते हैं।

इसते भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि युवाओं द्वारा लाया गया जनसंख्या संवेग जनसंख्या वृद्धि को प्रेरित करता है। इससे आने वाले दशकों के दौरान भारत की जनसंख्या निरंतर बढ़ती रहेगी।

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