मातृ
मृत्युदर
अनुपात
जन्म
देने
वाली
प्रति 10,000
महिलाओं
में से
मरने
वाली
महिलाओं
की
संख्या
को मातृ
मृत्युदर
अनुपात
के रूप
में
परिभाषित
किया
जाता है
चाहे
मृत्यु
गर्भावस्था
से
संबंधित
कारणों
से हुई
हो या
गर्भपात
कराने
के बाद 42
दिन के
भीतर
हुई हो।
भारत
में
जन्म
देते
समय
प्रति 100,000
महिलाओं
में से 301
महिलाएं
मौंत के
मुंह
में चली
जाती
हैं।
विकसित
देशों
मे
बच्चे
के जन्म
के
दौरान
मरने
वाली
महिलाओं
की
संख्या
20 से कम
है।
राज्यों
के मध्य
अंतर
बहुत
अधिक
पाया
जाता है,
इसलिए
इस
चुनौती
पर काबी
पाने के
लिए
तत्काल
ध्यान
केन्द्रित
करने की
आवश्यकता
है,
विशेषतः
दूरदराज
के
ग्रामीण
क्षेत्रों
में
जहां
आपातकालीन
स्थिति
में
देखरेख
के लिए
यातायात
के
साधनों
के अभाव
मे
पहुंचना
बहुत
मुश्किल
है।
उच्च
मातृ
मृत्युदर
के कारण
प्रसव
के
दौरान
लगभग 30
प्रतिशत
महिलाओं
को आपात
सहायता
की
आवश्यकता
होती
है।
समस्त
प्रसवों
में से
केवल 35
प्रतिशत
प्रसव
ही
डाक्टर
द्वारा
कराए
जाते
हैं।
केवल
15
प्रतिशत
प्रसव
उपचारिका
(नर्स), ए.
एन. दाई.
या
महिला
स्वास्थ्य
विजीटर
द्वारा
कराए
जाते
हैं।
शहरी
क्षेत्रों
में 69
प्रतिशत
से अधिक
प्रसव
किन्हीं
संस्थाओं
में
कराए
जाते
हैं
लेकिन
ग्रामीण
क्षेत्रों
में
केवल 30
प्रतिशत
प्रसव
ही
संस्थाओं
में
कराए
जाते
हैं। (डी
एल एच एस2)
मां
के
स्वास्थ्य
का
प्रभाव
बच्चे
के
स्वास्थ्य
पर
पड़ता
है।
किशोरावस्था
और
गर्भावस्था
के
दौरान
बच्चे
की
पौषणिक
स्थिति
उसकी
मां की
पोषणिक
स्थिति
से
प्रारम्भ
होती
है।
कुछ
तथ्यः
- गर्भावस्था
या
प्रसव
से
संबंधित
जटिलताओं
से
मरने
वाली
महिलाओं
की
संख्याविकसित
देशों
में 2800
में से
और
भारत
में 100
में से 1
है।
- जीवित
बची
माताएं
गर्भावस्था
या
प्रसव
के
दौरान
आने
वाली
जटिलताओं
के
कारण
या तो
किसी
गंभीर
बीमारी
से
पीड़ित
हैं या
शारीरिक
रूप से
असमर्थ
हो
जाती
है।
सुरक्षित
मातृत्व
- मां
के
जीवन
को
बचाने
के लिए
आपात
प्रासविक
सहायता
देना
अत्यंत
आवश्यक
है।
- अनुमान
है कि
प्रतिवर्ष
लगभग 70
लाख
गर्भपात
राजी
से
कराए
जाते
हैं।
अध्ययन
से पता
चलता
है कि
समस्त
मातृ
मौतों
में से
लगभग 10
प्रतिशत
मौतें
गर्भपात
से
संबंधित
जटिलताओं
के
कारण
होती
हैं।
- अन्य
20
प्रतिशत
महिलाओं
की
मृ्त्यु
खून की
कमी के
कारण
होती
है।
- आपात
प्रासविक
सुविधा
केन्द्रों
तक
पहुंचने
में
महिलाओं
को
सहायता
की
आवश्यकता
होती
है।
जीवन
बचाने
के लिए
महिलाओं
को
आपात
सहायता
उपलब्ध
कराने
के
बारे
में
जानकारी
देना
एक
संकटपूर्ण
कार्य
है।
- महिलाओं
को
आपात
गर्भनिरोधक
गोली
के
बारे
में यह
जानना
आवश्यक
है कि
चिकित्सीय
ढंग से
गर्भपात
कराना
कानूनी
है और
ऐसी
सेवाएं
कहां
उपलब्ध
है।
- प्रसवपूर्ण
सहायता
केन्द्र,
सुरक्षित
सेवा
संस्थाओं
में
जाने
के लिए
महिलाओं
को
प्रोत्साहित
करने
में
पुरूषों
को
शामिल
किए
जाने
की
आवश्यकता
है।
तथा
बच्चों
के
जन्म
के बीच
अंतर
एवं
सीमित
परिवार
रखने
के लिए
पति-पत्नी
दोनों
का
सामूहिक
उत्तरदायित्व
है।
| गर्भावस्था
के
दौरान
सादा
चावल
खाती
हुई
मिथुराय |
मातृ
मृत्युदर
अनुपातएक
चुनौती

अपर्याप्त
पोषण
से
खून
की
कमी
हो
जाती
है और
प्रसव
के
समय
अनेक
जटिलताएं
पैदा
हो
जाती
हैं।
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 |
| मातृ
मृत्युदर
अनुपात
एक
चुनौती |
-
मिथुराय,
लड़के
को
जन्म
देने
से
तीन
दिन
पहले
-
प्राथमिक
स्वास्थ्य
केन्द्र
दूर
होने
के
कारण
वहां
समय
पर
पहुंचना
कठिन
हो
सकता
है।
-
कोई
जटिलता
उतपन्न
होने
की
स्थिति
मे
देरी
होना
मां
की
मृत्यु
का
कारण
हो
सकती
है।
|
|
|
जो
देश
मातृ
मृत्युदर
कम कर
चुके
हैं वे
संस्थाओं
में
प्रसव
करानें
में
अधिक
बल
देते
हैं। |
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