होम   -  जनसंख्या के मूलसिद्धांत  -  जनसंख्या का विषय महत्वपूर्ण क्यों है   -  भारत में पुरूष और महिलाएं
पर्यवलोकन
जे.एस.के.  के कार्य
जे.एस.के.  किस प्रकार भिन्न है?
जे.एस.के.  की निधि
सदस्यता का पंजीकरण
दान और अंशदान
जिला स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े
  

विश्व की जनसंख्या

भारत की जनसंख्या

जनसंख्या का विषय महत्वपूर्ण क्यों है
- पर्यवलोकन
- जनसंख्या वृद्धि का प्रभाव
- जनसांख्यिक संक्रमण क्या है?
- जनसंख्य संवेग
- सहस्राब्दि विकासलक्ष्य
- मातृ मृत्युदर अनुपात
- भारत में पुरूष और महिलाएं
- शिशु मृत्युदर
- बाल विषय
- शिशु लिंग अनुपात
- कुल जननक्षमता दर
- योजनाबद्ध पितृत्व में पुरूषों की भागीदारी
- परिवार नियोजन की विधियों की जानकारी
सरलीकृत जनसंख्या की अवधारणा
सरकार के प्रचलित कार्यक्रम
जनसंख्या से संबंधित संपर्क

यौन और जनन स्वास्थ्य पर 
प्राय पूछे जाने वाले प्रश्नः

सीधे उत्तर

भारत में पुरूष और महिलाएं
  • भारत के कई राज्यों में 44 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु तक करा दी जाती है और वे उसके बाद शीघ्र ही मां बन जाती हैं। भारत के सभी राज्यों में किशोर लड़कियों में खून की कमी बहुत अधिक पाई जाती है। देर से शादी एवं पहले बच्चे को देर से जन्म देना ही ऐसी दो नीतियां हैं जिनसे लड़की को अपना खुद का स्वास्थ्य बनाने और स्वस्थ बच्चे को जन्म देने का अवसर प्राप्त होगा।

18 वर्ष से कम आयु पर शादी करने वाली लड़कियों के बारे में जानकारी के लिए यहां क्लिक करें (जनसंख्या चार्ट)

  • स्वस्थ लड़का चाहने की इच्छा से ही बच्चो के जन्म में पर्याप्त अंतर रखने वाली विधियों को स्वीकार करते हैं।
  • पुत्र प्राप्ति की बढ़ती हुई कामना के कारण जन्म पूर्व लिंग निर्धारण जांच कराई जाती है और मादा भ्रूण नष्ट करा दिया जाता है।
  • इससे असन्तुलित लिंग अनुपात, सामाजिक समस्याएं और महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ रहे हैं।
  • कण्डोम का अनुकूल प्रयोग करना पुरूष के निर्णय पर निर्भर है।
  • कुल बन्ध्यीकरण में से 98 प्रतिशत बन्ध्यीकरण महिलाओं पर किए जाते हैं जबकि चीरा रहित नसबंदी सरल और सुरक्षित है।


World Population Day, New Delhi 
on July 11, 2006.

ये ऐसे तथ्य हैं जो जनसंख्या स्थिर करने के प्रयासों में असन्तुलित तरीके से बाधा पहुंचाते हैं।

मातृ मृत्युदर अनुपात

  • देश की प्रगति का आकलन मातृ और शिशु की मृत्युदर के स्तरों से किया जाता है। भारत में यह अनुक्रमणी बहुत ऊंची है। बार-बार बच्चे को जन्म देना बहु शिशु और मृत्यु के लिए एक बीमा के रूप में माना जाता है। बहुत बड़ी संख्या में लोग गर्भ निरोध संबंधी सेवाओं का उपयोग नहीं कर पाते जबकि वे सुविधाएं उपलब्ध हैं, क्योंकि उन्हें या तो उन सेवाओं की जानकारी नहीं है या वे वहां तक पहुंच नहीं सकते।
  • शादी की आयु बढ़ाने और बच्चों के बीच अंतर रखने की आवश्यकता से जनता में जागरुकता पैदा करने के लिए शिक्षित पुरूषों को शामिल किया जाना नितान्त आवश्यक है।
गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं को पहले से नहीं बताया जा सकता

 

  • भारत में केवल 40 प्रतिशत प्रसव ही संस्थाओँ मे कराए जाते हैं।
  •  केवल 35 प्रतिशत प्रसव डाक्टर द्वारा कराए जाते हैं।
  • केवल 15 प्रतिशत नर्सर, ए. एन. एम. या दाई द्वारा कराए जाते हैं।
स्रोत डी. एल. एच. सी. एच, 2002-04

प्रति 1000 पुरूषों का अनुपात जानने के लिए यहां क्लिक करें, 2001 (बार चार्ट)
 

New Page 2

 © प्रतिलिपि अधिकार 2007,  जनसंख्या स्थिरता कोष , सर्वाधिकार सुरक्षित

 

(पिछला अद्यतनीकृतः 15.01.2008)