योजनाबद्ध
पितृत्व
में
पुरूषों
की
भागीदारी
शादी
की उम्र
तय करने
में और
स्वास्थ्य
एवं
परिवार
कल्याण
सेवाओं
का
उपयोग
करने
में
पुरूष
महत्वपूर्ण
भूमिका
अदा कर
सकते
हैं।
साधारणतः
वे जनन
स्वास्थ्य
पर
विचार
विमर्श
करने से
दूर
रहते
हैं।
कण्डोम
का
अनुकूल
प्रयोग
करना
पुरूषों
का अपना
निर्णय
होता
है।
यद्यपि
पुरूषों
का
बन्ध्यीकरण
(नसबंदी)
बहुत
प्रभावी
है और
इसका
कोई
पार्श्व
प्रभाव (साइड
इफेक्ट)
भी नहीं
होता,
परन्तु
फिर भी
अज्ञानता
और
अन्धविश्वासों
के कारण
भारत
में
केवल 2
प्रतिशत
लोगों
ने ही
इसे
स्वीकार
किया
है। यह
आवश्यक
है कि
नसबंदी
को पुनः
लोकप्रिय
बनाने
के लिए
सघन
प्रयास
किए
जाने
चाहिए।
पुरूषों
को यह
समझने
की
आवश्यकता
है कि
महिला
का
स्वास्थ्य
अच्छा
होना
चाहिए
तभी वह
एक
स्वस्थ
बच्चे
को जन्म
दे सकती
है।
उनके
लिए यह
महत्वपूर्ण
है कि वे
दो
बच्चों
के जन्म
के बीच
पर्याप्त
अंतर
रखने की
विधियाँ
अपनाएं
और
स्वास्थ्य
एवं
परिवार
कल्याण
सेवा
केन्द्रों
का पता
लगाने
में
महिलाओं
को
प्रोत्साहित
करें और
उनकी
मदद
करें।
प्रभुत्व
और
प्रभाव
रखने
शिक्षित
पुरूषों
और
महिलाओं
को
चाहिए
कि वे एक
राष्ट्रीय
आवश्यकता
के रूप
में
जनसंख्या
स्थिरीकरण
के
उद्देश्यों
का
समर्थन
करें और
वे
लोगों
को जिस
प्रकार
प्रभावित
कर सकें
वैसे
उनकी
सहायता
करें।
यह
नवाचारी
उपायों
के रूप
में
करना
होगा जो
परंपरागत
रूप से
किए जा
रहे
उपायों
से अलग
प्रकार
के
होंगे।
सामाजिक
उत्तरदायित्व
के भाग
के रूप
में
प्रत्येक
नियोक्ता
को अपनी
भूमिका
अदा
करते
हुए उन
पुरूषों
की यहा
संभव
सहायता
करना
चाहिए
जिन्हें
स्वास्थ्य
सेवाओं
की
जानकारी
और उन तक
पहुंचने
की
आवश्यकता
है।
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पुरूष
बन्ध्यीकरण
(नसबंदी)
पुरूषों
के लिए
नसबंदी
अत्यधिक
प्रभावी,
सुरक्षित
और
बन्ध्यीकरण
की
स्थायी
विधि
है।
पुरूष,
नसबंदी
के बाद
भी
वीर्य
बना
सकता
है और
उसकी
काम
अनुभूतियों,
इच्छा
और
क्षमता
में
कोई
कमी
नहीं
आती।
नसबंदी
से
नपुंसकता
व
कमजोरी
नहीं
आती
अथवा
कार्य
करने
और
परिवार
की मदद
करने
के लिए
पुरूष
की
क्षमता
पर कोई
प्रतिकूल
प्रभाव
नहीं
पड़ता।
इन
सबके
बावजूद
भी इस
समय
देश
में
केवल 2
प्रतिशत
लोगों
ने ही
इसे
स्वीकार
किया
है।
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