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जनसंख्या प्रक्षेपण

इस समय आधे बिलियन से अधिक भारतीय 25 वर्ष से कम आयु के हैं। प्रति वर्ष 260 लाख बच्चे पैदा होते हैं। भारत और राज्य के लिए जनसंख्या प्रक्षेपण पर तकनीकी ग्रुप की रिपोर्ट वर्ष 2001 से 2026, भारत की जनगणना 2001 के अनुसार।

  • भारत की जनसंख्या 2001 से 2026 तक की अवधि के दौरान 10290 लाख से बढ़कर 14000 लाख तक होने की आशा है, यह वद्धि 1.2 प्रतिशत वार्षिक की दर से 25 वर्ष में 36 प्रतिशत होगी। यद्यपि भारत की जनसंख्या वद्धि दर में कई वर्षों से कमी आ रही है, फिर भी समस्त जनसंख्या निरंतर बढ़ती रहेगी क्योकी कुल जनसंख्या की 51 प्रतिशत जनसंख्या जनन आयु वर्ग (15-49) वालों की है। इसमें प्रतिवर्ष लाखों की जनसंख्या और बढ़ती जाएगी। चालू स्तर पर, जनसंख्या स्थिर करने के लिए अभी कई दशक का समय और लगेगा।
  • कुल जनसंख्या में 2001 से 2026 तक की अवधि के दौरान 3710 लाख जनसंख्या और बढ़ जाएगी।
  • बिहार, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तरांचल सात राज्यों में 1870 लाख जनसंख्या और बढ़ जाने की संभावना है जो भारत की जनसांख्यिक वृद्धि का लगभग 50 प्रतिशत होगी।
  • कुल जनसंख्या वृद्धि की 22 प्रतिशत वृद्धि केवल उत्तर प्रदेश में ही होने का अनुमान है।
  • इसके विपरीत दक्षिण भारत के चार राज्यों अर्थात आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडू में कुल 470 लाख जनसंख्या वृद्धि की आशा की जाती है जो देश की कुल जनसाख्यिक वृद्धि की 13 प्रतिशत होगी।

वर्ष 2001-26 की अवधि के दौरान कुल प्रक्षेपित जनसंख्य वृद्धि में राज्यों के हिस्से का प्रतिशत
1- मध्य प्रदेश- 7.4 प्रतिशत, 2. गुजरात 5.0 प्रतिशत, 3. महाराष्ट्र- 9.8 प्रतिशत, 4. छत्तीसगढ़, 2.1 प्रतिशत, 5. उड़ीसा - 2.3 प्रतिशत, 6. झारखण्ड 2.9 प्रतिशत, 7. पश्चिम बंगाल - 5.5 प्रतिशत 8. आसाम 2.4 प्रतिशत 9. बिहार 8.3 प्रतिशत, 10. आन्ध्र प्रदेश 4.8 प्रतिशत, 11. कर्नाटक 3.8 प्रतिशत, 12. केरल 1.5 प्रतिशत, 13.तमिलनाडू 2.5 प्रतिशत, 14. उ.प्र. राज्य 10 प्रतिशतर, 15 जम्मू एवं कश्मीर 0.9 प्रतिशत, 16. हिमाचल प्रदेश 0.4 प्रतिशत, 17. पंजाब 1.9 प्रतिशत, 18. उत्तरांचल 0.9 प्रतिशत, 19. हरियाणा 2.7 प्रतिशत, 20. दिल्ली 3.8 प्रतिशत, 21. राजस्थान 6.7 प्रतिशत, 22.उत्तर प्रदेश 22.25 प्रतिशत


स्रोतः भारत और राज्यों के लिए जनसंख्या प्रक्षेपण - 2001-2026 (एन. सी. पी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय)

यदि राष्ट्रीय जनसंख्या नीति में 2010 के लिए निर्दिष्ट लक्ष्य को प्राप्त करना है तो कुल क्षमता दर, (जो बच्चों की संख्या सूचित करती है- औसतन एक महिला अपने जनन वर्षों के दौरान जितने बच्चे पैदा करती है) 2.1 होनी चाहिए। केरल, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडू, गोआ, महाराष्ट्र, पंजाब, आन्ध्र प्रदेश राज्य और कुछ संघशासित क्षेत्र यह लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं। हम उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा, उत्तरांचल, झारखण्ड और छत्तीसगढ़ राज्यों में अभी इस लक्ष्य से काफी दूर हैं जहां देश की 40 प्रतिशत जनसंख्या रहती है। ह्रास की इस चालू दर पर बहुत राज्यों में 2.1 की कुल जनन क्षमता दर को प्राप्त करने में 18 से 45 वर्ष का समय लगेगा। इन राज्यों में कुल जनन क्षमता दर कम करने के लिए विशेष उपाय करना नितान्त आवश्यक है।

कुल जनन क्षमता दर का चार्ट देखने के लिए यहां क्लिक करेः

आर्थिक और सामाजिक दोनों धारणीय विकास पर इसके बहुत गंभीर परिणाम पड़ते हैं। सार्थक परिवर्तन प्राप्त करने के लिए इस कार्य में संपूर्ण समाज का शामिल होना आवश्यक है। इसकी साधारण जानकारी मात्र से ही कोई ठोस परिणाम नहीं निकलेंगे। परिवार नियोजन के बारे में सामान्य जानकारी सार्वभौमिक है, परन्तु गर्भनिरोध की आधुनिक विधियों और उनके उप्पादों को प्राप्त करना बहुत से राज्यों में एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इसका महिलाओं के स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है, जिन्हें बार-बार अवांछित गर्भधारण करने और असुरक्षित गर्भपात कराने के दुष्परिणाम सहन करने पड़ते हैं, तथा उन्हें अल्पपोषित ऐसे बच्चों को जन्म देने का भी कष्ट सहन करना पड़ता है जिनके जीवित रहने अथवा सामान्य विकास होने के अवसर भी बहुत कम होते हैं।
 

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 © प्रतिलिपि अधिकार 2007,  जनसंख्या स्थिरता कोष , सर्वाधिकार सुरक्षित

 

(पिछला अद्यतनीकृतः 15.01.2008)