कुल
जननक्षमता
दर (टी.एफ.आर.)
कुल
जननक्षमता
दर (टी.
एफ. आर)
उन
बच्चों
की, कुल
संख्या
की
द्योतक
है
जिन्हें
एक औसतन
महिला
बच्चा
जनने की
अपनी
आयु
वर्षों
में
जन्म
देती
है।
भारत
में कुल
जननक्षमता
दर 3.0 है।
कुल
जननक्षमता
दर
जनसंख्या
स्थिरीकरण
के लिए
संभावनाओं
का
विश्लेषण
करने के
लिए एक
उपयोगी
सूचक
है।
केरल,
हिमाचल
प्रदेश,
कर्नाटक,
तमिलनाडु,
गोवा और
कुछ संघ
राज्य
क्षेत्र
2.1 या
इससे कम
की कुल
जननक्षमता
दर
प्राप्त
कर चुके
हैं।
नवीनतम
राष्ट्रीय
परिवार
स्वास्थ्य
सर्वेक्षण
- 3 से कई
प्रोत्साहक
प्रवृत्तियाँ
उभर कर
सामने
आई हैं।
जिन
राज्यों
का
सर्वेक्षण
किया
गया
उनमें
से तीन
और
राज्यों
ने कुल
जननक्षमता
का स्तर
प्राप्त
कर लिया
है -
महाराष्ट्र*
(2.1) पंजाब*
(2.0) और
आन्ध्र
प्रदेश
(1.8)। इसका
तात्पर्य
यह है कि
अब बाहर
राज्य
और संघ
राज्य
क्षेत्र
जननक्षमता
ह्रास
की रेखा
पार कर
चुके
हैं और
गुजरात
और
उड़ीसा
इसे
प्राप्त
करने की
स्थिति
में
पहुंच
गए हैं।
तथापि,
प्रक्षेपणों
के
अनुसार,
ह्रास
की चालू
दर पर
बहुत से
राज्य 2.1
की कुल
जननक्षमता
दर
प्राप्त
करने
में 18 से 45
वर्ष का
समय
लेंगे।
विशेषतः
ऐसे
राज्यों
में
राजस्थान,
मध्यप्रदेश,
बिहार,
उत्तर
प्रदेश,
छत्तीसगढ़,
झारखण्ड
और
उत्तराखण्ड
आते
हैं। इन
राज्यों
में कुल
जननक्षमता
दर कम
करने के
लिए
विशेष
उपाय
किए
जाने की
नितान्त
आवश्यकता
है।
उच्च
कुल
जननक्षमता
(3 या
अधिक)
वाले
राज्यों
में कुल
जनसंख्या
की 40
प्रतिशत
जनसंख्या
पाई
जाती
है।
केरल
में 1998
में और
तमिलनाडु
में 1993
में 2.1 की
कुल
जननक्षमता
दर
प्राप्त
करने के
लिए
शिक्षा
और जनन
स्वास्थ्य
सेवाओं
की
व्यवस्था
तथा
पोषण ही
मुख्यतः
उत्तरदायी
थे। इन
राज्यों
ने
प्राथमिकता
के आधार
पर
जनसंख्या
स्थिर
करके
शीघ्र
प्रगति
प्राप्त
की। यदि
हमे
जनसंख्या
स्थिर
करनी है
तो उच्च
कुल
जननक्षमता
वाले
राज्यों
में मां
और
बच्चे
के
स्वास्थ्य
को
प्रोत्साहित
करना
होगा।
जिन
राज्यों
में कुल
जननक्षमता
दर में
कभी आई
है
उन्होंने
इस
कार्य
को एक
लक्ष्य
के रूप
में
पूरा
किया
है।
जन्म
क्रम
तीन और
अधिक
जन्म
क्रम का
प्रतिशत
तीन और
उससे
अधिक
होना
जननक्षमता
का
प्रत्यक्ष
मानदण्ड
है।
जन्म
क्रम का
प्रतिशत
तीन और
उससे
अधिक
होने का
तात्पर्य
यह है कि
परिवार
कल्याण
कार्यक्रम
का
प्रभाव
कम पड़
रहा है।
दूसरे
शब्दों
में,
जन्म
क्रम का
प्रतिशत
तीन और
उससे कम
होने का
तात्पर्य
है कि उस
जिले का
विकास
होगा।
इस
श्रेणीकरण
के
अनुसार
निचले 100
में से
अधिकांश
जिले
अरूणाचल
प्रदेश,
बिहार,
झारखण्ड,
मध्यप्रदेश,
मेघालय,
मिजोराम,
नागालैण्ड,
राजस्थान
और
उत्तर
प्रदेश
से
संबंधित
हैं।
तालिकाः
- जिलों
का
श्रेणीकरण
और
मानचित्रण
सामाजिक
- आर्थिक
और
जनसांख्यिक
सूचकों
पर
आधारित-एन.
सी. पी.,
स्वास्थ्य
एवं
परिवार
कल्याण
मंत्रालय
|