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संरचन
जे.
एस. के.
के
शासी
बोर्ड
में इस
समय
सरकार,
सी आई.आई,
एफ. आई.
सी. सी.
आई और
दो
राष्ट्रीय
विख्यात
गैर
सरकारी
संगठन (डा.
एच
सुदर्शन,
करूणान्यास,
बैंगलोर
और डा.
अभय
बंग,
सर्च (एस.
ई. ए. आर.
सी. एच.),
गड़चिरोली)
सम्मिलित
हैं।
इसके
सामान्य
निकाय
और
शासी
बोर्ड
की
संरचना
को
विसतृत
रूप
देने
के लिए
प्रयास
पहले
से ही
प्रारम्भ
किए जा
चुके
हैं
जेसा
कि जे.
एस. के.
के
संगम
ज्ञापन
में
कहा
गया
है।
निम्नलिखित
क्षेत्रों
में
रूचि
रखने
वाले
सदस्यों
को
सामान्य
निकाय
में
शामिल
किया
जाता
है और
उनके
प्रतिनिधियों
का चयन
शासी
बोर्ड
के लिए
किया
जाता
है।
विशेष
रूचि
वाले
क्षेत्र
:
जनसांख्यिक
और
जनसंख्या
स्थिरीकरण
क्षेत्र
और
इसके
संबंद्ध
क्षेत्रों
के
विशेषज्ञ।
उद्योग
और
व्यापार
संघों
के
प्रतिनिधि।
गैर
सरकारी
संगठन (जनसंख्या
स्थितिकरण
के
क्षेत्र
में
सक्रिय)।
चिकित्सा
और परा-चिकित्सा
संघ।
जे.एस.के.
भी सभी
क्षेत्रों
से
सदस्य
बनाने
का
प्रयास
कर रहा
है और
उन
सबसे
दान और
चंदा
की
मांग
कर रहा
है
ताकि
सरकार
द्वारा
प्रदत्त
100 करोड़
रूपए
की
समग्र
निधि
को
बढ़ाया
जा सके
और
उससे
मिलने
वाले
ब्याज
का
उपयोग
नवीन
परियोजनाओं
प्रचालन
अनुसंधान
अध्ययनों
और उन
स्थानीय
पहलों
को
प्रोत्साहित
करने
पर
व्यय
किया
जा सके
जिनसे
गर्भनिरोध
और जनन
तथा
बाल
स्वास्थ्य
देखरेख
की
अप्राप्त
आवश्यकताओं
की
पूर्ति
की जा
सके।
जे.एस.के.
उन
लोगों
की मद
करेगा
जिन्हें
सूचना
और
कार्य
दोनों
क्षेत्रों
में
मदद की
आवश्यकता
है।
जे.एस.के.
को
भिन्न
प्रकार
से
कार्य
करने
की
स्वायत्तता
प्राप्त
है। यह
उन सभी
के साथ
साझेदारी
कर
चुका
है, जो
जनसंख्या
स्थिरीकरण
के
लक्ष्यों
और
उद्देश्यों
को
बढ़ावा
देते
हैं।
इसके
लक्ष्य
वर्ग
के
अंतर्गत
किशोर-किशोरियां,
नव
विवाहित
जोड़े
औद्योगिक
कामगार,
ग्रामीण
युवक/युवतियां
और
असंगठित
श्रमिक
शामिल
है। जे.एस.के.
ने
संचार
साधनों,
कर्मचारियों
और
समाज
के
प्रभावशाली
लोगों
को
विश्वास
में
लेना
प्रारम्भ
कर
दिया
है। जे.एस.के.
जनसंख्या
स्थिरीकरण
को
प्रयासों
को
प्रमुखता
देने
के
उद्देश्य
से
व्यवसायिकों,
सेवा
प्रबंधकों
और गैर-सरकारी
संगठनों
का एक
साथ
उपयोग
कर रहा
है। इस
कार्य
में जे.
एस. के.
को
स्वास्थ्य
एवं
परिवार
कल्याण
मंत्रालय,
यू. एन.
एफ. पी. ए.,विश्व
स्वास्थ्य
संगठन,
सी आई.आई
और एफ.आई
सी.सी.आई
का
सहयोग
प्राप्त
हो रहा
है। |
कार्यकलाप
जे.
एस. के.
क्या
कर
चुका
है?
जे.
एस. के.
जी. आई.
एस. के
मानचित्रों
और
जनसंख्या
आंकड़ों
के
अद्वितीय
एकीकरण
के
जरिए
समस्त
भारत
में 485
जिलों
के
मानचित्र
तैयार
कर
चुका
है जो
प्रत्येक
जिले,
इसके
उप-प्रभागों
और
प्रत्येक
गांव
की
जनसंख्या
तथा
स्वास्थ्य
सुविधाओं
से
दूरी
की
स्थिति
दर्शाते
हैं।
प्रत्येक
गांव
तक
पहुंचाई
गई
सुविधाओं
की
विषमता
को भी
मानचित्रों
में
दर्शाया
गया है
वे
सुविधाएं
वहाँ
उपलब्ध
कराई
जाएं
जहाँ
उनकी
अत्यधिक
आवश्यकता
है।
जे.
एस. के.
ने उन
जिलों
को
श्रेणियों
में
विभाजित
किया
है
जिनका
अध्ययन
किया
जा
चुका
है। और
गर्भनिरोधक
के
प्रयोग
में
पाई गई
असमानता
तीन या
इससे
अधिक
बच्चों
वाली
महिलाओं
और 5
वर्ष
से कम
उम्र
वालों
की
मृत्युदर
का
प्रतिशत
दर्शाया
हैं और 600
मुख्य
जिलों
के
अधिकारियों
और
राजनैतिक
प्रतिनिधियों
को इस
बात के
लिए
प्रेरित
किया
है कि
वे उन
उप-जिलों
और
गांवों
पर
ध्यान
केन्द्रित
करें
जहां
अब तक
कम
प्रयास
किए गए
हैं।
जे.
एस. के.
वित्त
मंत्रालय
का यह
अनुमोदन
प्राप्त
कर
चुका
है कि
उसे
प्राप्त
दान की
धनराशि
आयकर
अधिनियम,
1961 की
धारा 80
जी (2) (क) ¼vii½
के
अधीन 100
प्रतिशत
आयकर
से
मुक्त
होगी। दान
और
अंशदान
संबंधी
धारा
देखें।
विश्व
जनसंख्या
दिवस
पर - 11
जुलाई, 2007,
जे. एस.
के.
बिहार,
छत्तीसगढ़,
मध्य
प्रदेश,
उड़ीसा,
राजस्थान
झारखण्ड,
उत्तराखण्ड
और
उत्तर
प्रदेश
के जिन
गांवों
में
न्यून
प्रयास
किए गए
थे उन
गांवों
से 500
किशोर/किशोरियों
और
नवयुवकों
को 2 दिन
के
सत्र
में
लाया
तथा
उन्हें
एक
उत्तरदायी
पितृत्व
के
बारे
में
बताया
गया और
उन्हें
युवकों
का
नेतृत्व
करने
के लिए
प्रेरित
किया
गया
ताकि
वे देर
से
शादी
करने,
पहला
बच्चा
देर से
पैदा
करने
और
अगले
बच्चों
के
जन्म
में
पर्याप्त
अंतर
रखने
के लिए
लोगों
को
समझा
सकें।
जनसंख्या
स्थिरता
कोष
क्या
कार्य
करेगा?
नवीन
परियोजनाओं
और
विशेषतः
उन
परियोजनाओं
में
सहायता
देना
जो
गर्भनिरोध
और जनन
एवं
बाल
स्वास्थ्य
को
प्रोत्साहित
करती
हों।
एक नई
परियोजना
के
अधीन
कॉल
सेंटर
स्थापित
किए
जाने
पर
विचार
किया
जा रहा
है
ताकि
सॉफ्टवेयर
आधारित
कम्प्यूटर
का
प्रयोग
करते
हुए
यौन
स्वास्थ्य
और
परिवार
नियोजन
पर
अंग्रेजी
व
हिन्दी
में
सूचना
दी जा
सके।
हिन्दुस्तान
कम्प्यूटर
लिमिटेड
और एफ.
आई. सी.
सी आई.
इस
कार्य
में
हमारे
साथ
साझेदारी
कर रहे
हैं।
कॉल
सेंटर
उन्हें
सेवा
प्रदान
करेंगे
जो,
विशेषतः
किशोर-किशोरियां,
नवविवाहित
और
विवाह
करने
वाले
जोड़े
टेलीफोन
पर
परामर्श
लेना
चाहते
हैं और
सर्वांगपूर्ण
प्रयोगशाला
आधारित
सॉफ्टवेयर
का
प्रयोग
करते
हैं।
असंगठित,
अकुशल
और
प्रवासी
श्रमिकों
को
सूचना
उपलब्ध
कराने
तथा
सूची
बद्ध
गैर-सरकारी
संगठनों
का
प्रयोग
करते
हुए
गर्भनिरोध
और जनन
स्वास्थ्य
के
बारे
में
जानकारी
देन पर
ध्यान
केन्द्रित
किया
जाना
चाहिए।
अब
विर्च्यअल
रिसोर्स
सेंटर (वी.
आर. सी)
अति
शीघ्र
ही
स्थापित
किया
जाना
है जो
अरक्त्ता
लिंग,
मां और
शिशु
मृत्युदर,
क्षीयमान
(वेनिंग)
लिंग,
अनुपात,
युवक-युवतियों
के
स्वास्थ्य,
बच्चों
के
जन्म
में
समय का
अंतर
आदि
जैसे
विषयों
पर
प्राप्य
फिल्में,
पोस्टर,
फोटो
आदि
मीडिया
अनुसंधानकर्ताओं,
विद्यार्थियों,
गैर-सरकारी
संगठनों
और आम
जनता
को
उपलब्ध
कराता
है। अब
विश्वविद्यालय
और
विद्यालय
स्तर
पर
प्रश्नोत्तरी
प्रतियोगिताएं
रखी
जाती
हैं जो
वी. आर.
सी का
उपयोग
करने
के लिए
पणधारियों
को और
प्रोत्साहित
करती
हैं।
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